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सिर्फ खुशबू ही नहीं कई बीमारियों में भी फायदेमंद है केवड़ा

  • 12-Sep-2020
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केवड़ा सुगंधित फूलों वाले वृक्षों की एक प्रजाति है जो अनेक देशों में पाई जाती है और घने जंगलों मे उगती है। पतले, लंबे, घने और कांटेदार पत्तों वाले इस पेड़ की दो प्रजातियां होती हंै- सफेद और पीली। सफेद जाति को केवड़ा और पीली को केतकी कहते हैं। केतकी बहुत सुंगधित होती है और उसके पत्ते कोमल होते हैं। इसमें जनवरी और फरवरी में फूल लगते हैं। केवड़े की यह सुगंध सांपों को बहुत आकर्षित करती है। इनसे इत्र भी बनाया जाता है जिसका प्रयोग मिठाइयों और पेयों में होता है। कत्थे को केवड़े के फूल में रखकर सुगंधित बनाने के बाद पान में उसका प्रयोग किया जाता है। केवड़े के अंदर स्थित गूदे का साग भी बनाया जाता है। इसे संस्कृत, मलयालम और तेलुगु में केतकी, हिन्दी और मराठी में केवड़ा, गुजराती में केवड़ों, कन्नड़ में बिलेकेदगे गुण्डीगे, तमिल में केदगें फारसी में करंज, अरबी में करंद और लैटिन में पेंडेनस ओडोरा टिसीमस कहते हैं। इसके वृक्ष गंगा नदी के सुन्दरवन डेल्टा में बहुतायत से पाए जाते हैं।
Lifestyle News सिर्फ खुशबू ही नहीं कई बीमारियों में भी फायदेमंद है केवड़ा
केवड़ा के कई फायदे हैं। इसका उपयोग इत्र, लोशन, तम्बाकू, अगरबत्ती आदि में सुगंध के रूप में किया जाता है। साथ ही इसकी पत्तियों से चटाई, टोप, टोकनियां, पत्तल आदि बनाई जाती हैं। ओडि़शा में केवड़े के फूल को फूलों का राजा कहा जाता है। केवड़ा का पौधा 18 फीट तक बढ़ता है और एक बार में 30 से 40 फल देता है। इसका फल शुरूआत में सफेद रंग का होता है इसीलिए इसे सफेद कमल भी कहा जाता है। आयुर्वेद में लगभग 12 हजार औषधीय जड़ी- बूटियों का उल्लेख मिलता है, जिसमें से केवड़ा भी एक है। आधुनिक शोधों व अनुसंधानों ने सिद्ध कर दिया है कि केवड़ा में अनेक औषधीय गुण हैं, जिनका कोई जवाब नहीं है। आइए जानते हैं इस सुगंधित पौधे के फायदे और नुकसानों के बारे में - केवड़ा के आयुर्वेदिक गुण - केवड़ा जल का उपयोग मिठाई, स्वीट सिरप और कोल्ड ड्रिंक्स आदि में सुगंध के रूप में भी किया जाता है। इसकी सुंगध एक तरह से मानसिक शांति प्रदान करती है। -इसमें एंटीफंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसके कारण ये किसी भी तरह के संक्रमण को फैलने से रोकता है। - केवड़ा का तेल का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दृष्टि से बड़ा ही लाभकारी है। इसे सिर दर्द व गठिया जैसे रोगों का उपचार किया जाता है। - इसके फूल में शरीर के सौंदर्य को बढ़ाने वाले गुण भी पाये जाते हैं। - केवड़ा के पत्ते विषनाशक होते हैं। इसका इस्तेमाल जहर के असर को कम करने के लिए भी किया जाता है। -यही नहीं केवड़ा की पत्तियों का उपयोग चेचक, खुजली, कुष्टरोग, ल्यूकोडर्मा के उपचार में भी किया जाता है। केवड़ा की पत्तियों को पीस कर इसके लेप को स्किन पर लगाया जाता है और ये बहुत ही कारगर उपचार साबित होता है। - केवड़ा के पत्तों को उबाल कर एक तरह का काढ़ा बनाया जाता है जिसके रोजाना सेवन से कई बीमारियां दूर होती हैं। - कितना भी सिर दर्द क्यों न हो रहा हो, केवड़ा का तेल के इस्तेमाल से ये दर्द मिनटों में दूर भाग जायेगा। जी हां, सिर में दर्द होने पर केवड़ा के तेल से मालिश करें, बहुत आराम मिलेगा। - बुखार के दौरान शरीर में थकावट इतनी बढ़ जाती है कि इंसान अपने आप को और भी ज्यादा बीमार महूसस करने लगता है। ऐसे में अगर उसे केवड़े का रस 40 से 60 मिलीलीटर की मात्रा में पिला दिया जाए तो उसका बुखार भी उतर जाएगा और शरीर में तरावट भी आ जायेगी। - केवड़ा का अर्क शरीर के हर तरह के दर्द खासतौर पर जोड़ों के दर्द से राहत देता है। रोजाना केवड़े के तेल से मालिश करने से गठिया जैसे रोग भी जड़ से समाप्त हो जाते हैं। - पेट की बीमारियों से पीडि़त लोगों के लिए केवड़ा बहुत ही फायदेमंद होता है। इसका इस्तेमाल पेट में जलन, पेट दर्द, गैस, ब्लोटिंग आदि की समस्या को दूर करने के लिए भी किया जाता है। - एक्सपर्ट बताते हैं कि केवड़ा तनाव दूर करने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक उपाय माना जाता है। दरअसल, केवड़ा के पत्तों में एंटी- स्ट्रेस एजेंट पाये जाते हैं जो कि हमारे तनाव और मानसिक असंतुलन को ठीक करते हैं। इसके अलावा इसकी खुशबू मानसिक विश्राम देती है। - केवड़ा भूख बढ़ाने में भी सहायक है। केवड़ा का अर्क अगर नियमित रूप से खाने में इस्तेमाल करते हैं तो भूख पहले की तुलना में अधिक बढ़ जाती है। - केवड़ा पानी एक अच्छे क्लींजर के तौर पर काम करता है और स्किन से गंदगी और अशुद्धियों को बड़ी ही कुशलता से बाहर निकालता है। केवड़ा में मौजदू एंटी एंजिग गुण स्किन को पोषण देते हैं। इससे आपकी त्वचा लंबे समय तक जवां बनी रहती है। केवड़ा जल की सबसे बड़ी खासियत है कि ये स्किन के दाग-धब्बों और मुहांसों को कम करता है।