Friendship Shayari

दोस्ती की महफ़िल सजे ज़माना हो गया

दोस्ती की महफ़िल सजे ज़माना हो गया,

लगता है खुल के जिए ज़माना हो गया,

काश कहीं मिल जाये वह काफिला दोस्तों का,

अपनों से बिछड़े ज़माना हो गया..

जान की बाज़ी लगा दी जुवारी बनकर

जान की बाज़ी लगा दी जुवारी बनकर,
दिल हतेली पर ले आये पुजारी बनकर,
जिस वक़्त दुआ क दरवाज़े खुलेंगे…
ए दोस्त मांग लेंगे तुझे खुदा से भिखारी बनकर.