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मून मिशन: 2024 में चांद पर पहली बार कदम रखेगी महिला, मिशन पर 2 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च

  • 23-Sep-2020
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वॉशिंगटन , 23 सितंबर |अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा एक बार फिर चांद पर इंसान को भेजने की योजना बना रही है. 1972 में पहली बार नासा ने चांद पर इंसान को भेजा था. नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टीन ने बताया कि, 'नासा 2024 में चंद्रमा पर पहली महिला एस्ट्रोनॉट (Female astronaut) को उतारने की योजना बना रहा है. इस मिशन पर एक पुरुष ऐस्ट्रोनॉट भी साथ जाएंगे.' नासा के अनुसार इस मिशन की शुरुआत चांद पर वैज्ञानिक खोज, आर्थिक लाभ और नई पीढ़ी के खोजकर्ताओं को प्रेरणा देने के लिए किया जा रहा है.
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नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टीन ने ब्रीफिंग में बताया कि, इस मिशन में बजट को लेकर थोड़ी अड़चन है, क्योंकि देश में राष्ट्रपति चुनाव है. अगर अमेरिकी संसद दिसंबर तक प्रारंभिक बजट के तौर पर 23 हजार 545 करोड़ रुपये की मंजूरी देती है, तो हम चांद पर अपने अभियान को अंजाम दे पाएंगे. उन्होंने बतया कि इस मिशन में नासा चंद्रमा के अनछुए साउथ पोल पर अंतरिक्षयान की लैंडिंग करेगा. यह मिशन 4 साल में पूरा होगा और इस पर करीब 28 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा. ब्रिडेनस्टीन ने कहा, 'इस मिशन में नई तरह की चीजों की खोज होगी. इसमें पहले किए गए वैज्ञानिक शोध से भिन्न शोध किए जाएंगे.' उन्होंने बतया कि 1969 के अपोलो मिशन के समय हमें लगता था कि चांद सूखा है, लेकिन अब हमें पता है कि चांद के साउथ पोल पर भारी मात्रा में पानी मौजूद है. इस वक्त तीन लूनर लैंडर के निर्माण का कार्य चल रहा हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा. नासा के अनुसार पहला लैंडर ब्लू ओरिजिन अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की कंपनी बना रही है, दूसरा लैंडर एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और तीसरा लैंडर डाइनेटिक्स कंपनी बना रही हैं. नासा ने अपने इस मिशन को अर्टेमिस नाम दिया है, यह कई चरणों में होगा. पहला चरण मानव रहित ओरियन स्पेसक्राफ्ट से नवंबर 2021 में शुरू होगा. मिशन के दूसरे और तीसरे चरण में एस्ट्रोनॉट चांद के आसपास चक्कर करेंगे और चांद की सतह पर उतरेंगे. जो अपोलो-11 मिशन की तरह एक सप्ताह तक चलेगा और इस दौरान एस्ट्रोनॉट एक सप्ताह तक चांद की सतह पर काम करेंगे. नासा ने 1969 से 1972 तक अपोलो-11 समेत 6 मिशन चांद पर भेजे नासा के मुताबिक, अमेरिका ने 1969 से 1972 तक अपोलो-11 समेत 6 मिशन चांद पर भेजे थे. 20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 के जरिए पहली बार एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रॉन्ग, एडविन ऑल्ड्रिन चांद की जमीन पर उतरे थे.(news18)