Hindi Shayari

सितम ढाने की हद होती है


सितम ढाने की हद होती है,
पास ना आने की रूठ जाने की हद होती है,
à¤à¤• SMS तो कर दे जालिम,
पैसे बचाने की भी हद होती है! ?

मंजिल उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ को मिलती है

मंजिल उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ को मिलती है,
जिनके हौसलों में जान होती है…
और बंद भटà¥à¤ à¥€ में भी दारू उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ को मिलती है,
जिनकी भटà¥à¤ à¥€ में पहचान होती है! ? ?

नखरे आपके तौबा-तौबा

नखरे आपके तौबा-तौबा
गजब आपका सà¥à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤² है,
मेसेज तो आप कभी करते नहीं,
बस हलà¥à¤²à¤¾ मचा रखा है की..
हमारे पास भी मोबाईल है। ?

जà¥à¤²à¥à¤«à¥‹à¤‚ में फूलों को सजा के आयी

जà¥à¤²à¥à¤«à¥‹à¤‚ में फूलों को सजा के आयी,
चेहरे से दà¥à¤ªà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ उठा के आयी,
किसी ने पूछा आज बड़ी खà¥à¤¬à¤¸à¥‚रत लग रही है,
हमने कहा शायद आज नहा के आयी! ?

इशà¥à¥˜ में ये अंजाम पाया है

इशà¥à¥˜ में ये अंजाम पाया है,
हाथ पैर टूटे, मà¥à¤à¤¹ से खून आया है,
हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² पहà¥à¤‚चे तो नरà¥à¤¸ ने फ़रमाया..
बहारों फूल बरसाओ, किसी का आशिक़ आया है! ????

मà¥à¤à¥‡ ज़िंदगी का इतना तजà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾

मà¥à¤à¥‡ ज़िंदगी का इतना तजà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾
तो नहीं है दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚,
पर लोग कहते हैं
यहाठसादगी से कटती नहीं।

नजरिया बदल के देख

नजरिया बदल के देख,
हर तरफ नजराने मिलेंगे,
ठज़िंदगी यहाà¤
तेरी तकलीफों के भी दीवाने मिलेंगे।

अब समठलेता हूà¤

अब समठलेता हूà¤
मीठे लफ़à¥à¥›à¥‹à¤‚ की कड़वाहट,
हो गया है ज़िंदगी का
तजà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾ थोड़ा थोड़ा।

हर बात मानी है

हर बात मानी है
तेरी सिर à¤à¥à¤•ा कर ठज़िंदगी,
हिसाब बराबर कर तू भी
तो कà¥à¤› शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ मान मेरी।

अकेले ही गà¥à¤œà¤° जाती है

अकेले ही गà¥à¤œà¤° जाती है 
तनà¥à¤¹à¤¾ ज़िंदगी,
लोग तसलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤ तो देते हैं 
साथ नहीं देते।

ज़िंदगी जिसका बड़ा नाम सà¥à¤¨à¤¾ है हमने

ज़िंदगी जिसका बड़ा नाम सà¥à¤¨à¤¾ है हमने,
à¤à¤• कमजोर सी हिचकी के सिवा कà¥à¤› भी नहीं।

ये कशमकश है

ये कशमकश है
कैसे बसर ज़िंदगी करें,
पैरों को काट फेंके
या चादर बड़ी करें।

नफरत सी होने लगी है

नफरत सी होने लगी है
इस सफ़र से अब,
ज़िंदगी कहीं तो पहà¥à¤à¤šà¤¾ दे
खतà¥à¤® होने से पहले।

इक टूटी-सी ज़िंदगी

इक टूटी-सी ज़िंदगी को समेटने की चाहत थी,
न खबर थी उन टà¥à¤•ड़ों को ही बिखेर बैठेंगे हम।

समंदर न सही पर à¤à¤• नदी तो होनी चाहिà¤

समंदर न सही पर à¤à¤• नदी तो होनी चाहिà¤,
तेरे शहर में ज़िंदगी कहीं तो होनी चाहिà¤à¥¤

दिन खूबसूरत था

दिन खूबसूरत था,
ज़िनà¥à¤¦à¤—ी भी हो सकती थी,
तà¥à¤® ज़रा ठहरते,
तो à¤à¤• शायर की शायरी भी हो सकते थे!

मेरे लफà¥à¤œà¤¼ लफ़à¥à¤œà¤¼ में तेरी बात है मेरा

मेरे लफà¥à¤œà¤¼ लफ़à¥à¤œà¤¼ में तेरी बात है मेरा हरà¥à¤« हरà¥à¤« यूं ना मिटा…
मैं बिखर गया मà¥à¤à¥‡
समेट तू मà¥à¤à¥‡ धूल
गरà¥à¤¦ में यूं ना उड़ा…
तेरे सोहबत की आदत सी थी
बेदिली से यूं ना सता…
मेरी सांस बन के रहेगी तू वादे जो थे यूठना भà¥à¤²à¤¾â€¦
तà¥à¤à¥‡ चाहना है क़à¥à¤¸à¥‚र अब सरेबाज़ार यूठइशà¥à¤•़ ना लà¥à¤Ÿà¤¾â€¦

हमारी शराफत का कà¥à¤› लोग

हमारी शराफत का कà¥à¤› लोग…
यूं लà¥à¤«à¥à¤¤ उठा रहे हैं…
खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बदले गम
देकर…
उसकी कीमत हमें मà¥à¤«à¥à¤¤ बता रहे
हैं…