Hindi Shayari

मुस्कुराने की वजह तुम थे

मुस्कुराने की वजह तुम थे…
अब रुलाने की वजह भी तुम
बने......

जुड़कर टूटना ,टूटकर जुड़ना

जुड़कर टूटना ,टूटकर जुड़ना,
कैसे रोकूं इस दिल का रोना,
तेरे इश्क़ ने दिया है सुकून इतना,
जाने के बाद तेरे हर पल लगे सुना सुना | 

वो बिछड़ के हमसे ये दूरियां कर गई

वो बिछड़ के हमसे ये दूरियां कर गई,
न जाने क्यों ये मोहब्बत अधूरी कर गई,
अब हमे तन्हाइयां चुभती है तो क्या हुआ,
कम से कम उसकी सारी तमन्नाएं तो पूरी हो गई।

दिन हुआ है, तो रात भी होगी

दिन हुआ है, तो रात भी होगी,
मत हो उदास, उससे कभी बात भी होगी।
वो प्यार है ही इतना प्यारा,
ज़िंदगी रही तो मुलाकात भी होगी।

सोचा था तड़पायेंगे हम उन्हें

सोचा था तड़पायेंगे हम उन्हें,
किसी और का नाम लेके जलायेगें उन्हें,
फिर सोचा मैंने उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
तो फिर भला किस तरह सताए हम उन्हें।

हम पर जो गुजरी है

हम पर जो गुजरी है, 
तुम क्या सुन पाओगे,
नाजुक सा दिल रखते हो, 
रोने लग जाओगे।

मुद्दतें बीत गई ख्वाब सुहाना देखे

मुद्दतें बीत गई ख्वाब सुहाना देखे,
जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा।

बुला रहा है

बुला रहा है 
कौन मुझको उस तरफ,
मेरे लिए भी क्या कोई उदास बेक़रार है।

जिसके नसीब मे हों

जिसके नसीब मे हों 
ज़माने की ठोकरें,
उस बदनसीब से ना 
सहारों की बात कर।

दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती

दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती।

बहुत नायाब होते हैं

बहुत नायाब होते हैं 
जिन्हें हम अपना कहते हैं,
चलो तुमको इज़ाजत है 
कि तुम अनमोल हो जाओ।

जन्नत-ए-इश्क में हर बात

जन्नत-ए-इश्क में हर बात
अजीब होती है,
किसी को आशिकी तो 
किसी को शायरी नसीब होती है।

रूबरू मिलने का मौका

रूबरू मिलने का मौका 
मिलता नहीं है रोज,
इसलिए लफ्ज़ों से तुमको 
छू लिया मैंने।

वो रख ले कहीं अपने

वो रख ले कहीं अपने 
पास हमें कैद करके,
काश कि हमसे कोई 
ऐसा गुनाह हो जाये।

मोहब्बत नाम है जिसका

मोहब्बत नाम है जिसका 
वो ऐसी क़ैद है यारों,
कि उम्रें बीत जाती हैं 
सजा पूरी नहीं होती।

संभाले नहीं संभलता है दिल

संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।

मुझ में लगता है

मुझ में लगता है 
कि मुझ से ज्यादा है वो,
खुद से बढ़ कर मुझे रहती है 
जरुरत उसकी।

कोई रिश्ता जो न होता

कोई रिश्ता जो न होता, 
तो वो खफा क्यों होता?
ये बेरुखी, 
उसकी मोहब्बत का पता देती है।