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एक नहीं 4 तरह के होते हैं नारियल तेल, जानें नारियल तेल से कुकिंग करने पर मिलते हैं क्या फायदे
बात चाहे खूबसूरती निखारने की हो या फिर काले लंबे बालों की, नारियल का तेल हर मर्ज की दवा माना जाता है। साउथ इंडिया में तो लोग नारियल के तेल का इस्तेमाल खाना बनाने तक में करते हैं। नारियल के तेल में लगभग 90 प्रतिशत सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है। इसकी खासियत यह भी है कि इसमें सैचुरेटेड लॉरिक एसिड होता है, जो कि इसके टोटल फैट का 40 प्रतिशत ही होता है। नारियल का तेल हाई हीट में भी ऑक्सिकरण प्रतिरोधी होता है। इसलिए ये हाई हीट कुकिंग जैसे फ्राइंग के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि बाजार में मिलने वाले सभी नारियल तेल एक जैसे होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। आपको सुनकर हैरानी हो सकती है कि नारियल तेल एक या दो नहीं बल्कि 4 तरह के होते हैं। आइए जानते हैं नारियल तेल के कौन से हैं ये 4 प्रकार और इस तेल से खाना पकाने से सेहत को मिलते हैं क्या लाभ।
बदलते मौसम में स्किन को हाइड्रेट रखने के लिए इन बेस्ट तरीकों से करें खीरे का इस्तेमाल
मौसम बदलते ही आपकी स्किन निखार खोने लग जाती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण होता है कि स्किन अपना हाड्रेशन खोने लग जाती है और स्किन ड्राय हो जाती है। इस कारण से स्किन काफी डल नजर आती हैं। ऐसे में आपको स्किन को हाइड्रेट रखने के लिए खीरे का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे न सिर्फ स्किन हाइड्रेट बनती है बल्कि बाकी स्किन प्रॉब्लम्स भी दूर हो जाती हैं।
रात में पैरों को धोकर सोने से होते हैं ये 6 फायदे, क्या आपमें है ये अच्छी आदत?
Washing Feet before Sleeping Benefits: बाहर से आकर खुद को साफ-सुथरा करने से आप कई तरह के इंफेक्शन एवं रोगों से बचे रह सकते हैं. रात में सोने से पहले आप सिर्फ चेहरे को ही नहीं, बल्कि पैरों को भी साफ करके सोएं, नींद भी अच्छी आएगी और आप तरोताजा भी महसूस करेंगे.
विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर गुग्गुल करे कई रोगों का उपचार
गुग्गुल या गुग्गल एक वृक्ष है। इससे प्राप्त राल जैसे पदार्थ को भी गुग्गल कहा जाता है। भारत में इस जाति के दो प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं। एक को कॉमिफ़ोरा मुकुल तथा दूसरे को कॉ. रॉक्सबर्घाई कहते हैं। अफ्रीका में पाई जाने वाली प्रजाति कॉमिफ़ोरा अफ्रिकाना कहलाती है। घरों में शुद्ध वातावरण के लिए गुग्गुल की धूप जलाना शुभ माना जाता है।
इंटरनेट युग में भी कम नहीं हुआ है करवा चौथ का क्रेज
पाश्चात्य जीवनशैली को अपनाने की होड़ और मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में गोते लगाती जिंदगी ने पारंपरिक त्योहारों का आकर्षण भले ही प्रभावित किया हो लेकिन पौराणिक काल से ही पति पत्नी के बीच असीम प्रेम के प्रतीक रहे ‘करवा चौथ’ के पर्व का क्रेज दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।
कच्ची हल्दी या हल्दी की गांठ है ज्यादा स्वास्थ्यकारी
हल्दी हमारी रसोई के मसालों का एक अभिन्न हिस्सा है। बात चाहें खाने की करें या घरेलू नुस्खों की करें ये हर काम में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं बात अगर आयुर्वेद की करें, तो ऑयुर्वेद में हल्दी को कई औषधीय गुणों की भरमार माना जाता है। ये जहां छोटी मोटी चोटों को ठीक कर सकता है, वहीं हड्डियों के दर्द को भी कम कर सकता है। साथ ही इसके एंटीवायरल और एंटीबायोटिक गुणों से तो हम लोग वाकिफ हैं ही, जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते है। पर क्या आपको पता है कि बाजार से मिलना वाला हेल्दी पाउडर भी इन्हीं गुणों वाला है या नहीं?
पाचन क्रिया दुरुस्त करने वाला पान जिसका उपयोग हमारे देश में पूजा-पाठ के साथ-साथ खाने में भी होता है।
पान एक बहुवर्षीय बेल है, जिसका उपयोग हमारे देश में पूजा-पाठ के साथ-साथ खाने में भी होता है। खाने के लिए पान पत्ते के साथ-साथ चूना कत्था तथा सुपारी का प्रयोग किया जाता है। इसे संस्कृत में नागबल्ली, ताम्बूल हिन्दी भाषी क्षेत्रों में पान मराठी में पान/नागुरबेली, गुजराती में पान/नागुरबेली तमिल में बेटटीलई,तेलगू में तमलपाकु, किल्ली, कन्नड़ में विलयादेली और मलयालम में बेटीलई नाम से पुकारा जाता है।
सुबह खाली पेट गर्म नींबू पानी पीना काफी फायदेमंद माना जाता है।
वजन कम करने के लिए सही आहार और एक्सरसाइज दो सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं, जिनके माध्यम से आप आसानी से अपने शरीर की चर्बी को कम कर सकते हैं। जब तक आप अपने रूटीन को फॉलो नहीं करेंगे आप कितनी भी मेहनत कर लीजिए आपका वजन जस का तस बना रहेगा। अगर आप अपने शरीर की अतिरिक्त चर्बी को घटाना चाहते हैं तो सही समय पर संतुलित भोजन करने की आदत डालें साथ ही नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। इन सबके साथ ही यहां हम आपको एक और घरेलू नुस्खा अपनाने का तरीका बता रहे हैं जो वजन कम करने में आपकी मदद करेगा।
कोरोना काल में अमृत के समान है ये 4 औषधि
दुनिया में कोरोना वायरस महामारी फैली है। इस वायरस से लडऩे का एक मुख्य उपाय है कि सेहतमंद रहा जाए और और संक्रमण के खिलाफ अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाए। आयुर्वेद चिकित्सा की प्राचीन व भरोसेमंद पद्धति है। यह उन तरीकों पर बल देती है, जिनसे एक सेहतमंद प्रतिरक्षा प्रणाली बनाए रखने के लिए शरीर को मजबूत करते हैं। औषधियों व प्राकृतिक अवयवों से प्राप्त किए गए तत्व न केवल आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं, अपितु आपकी रोगों से लडऩे की शक्ति बढ़ाते हैं।
पुरुषों व महिलाओं के शरीर के तापमान से जुड़े ये 5 रोचक तथ्य जो आप नहीं जानते होंगे, मगर आपको जानना चाहिए!
उपवास के समय सेंधा नमक को लोग अक्सर उपवास के समय ही खाते हैं...
शारदीय नवरात्र का पर्व 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। इसी के साथ देवी आराधना और व्रत, उपवास का दौर भी शुरू हो जाएगा। उपवास में लोग फल, आलू , साबूदाना आदि चीजों का सेवन करते हैं और इसमें आम नमक नहीं , बल्कि सेंधा नमक डाला जाता है। आइए जानते हैं कि क्यों उपवास के समय सेंधा नमक खाया जाता है। और कैसे सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है ये नमक। जब हम उपवास रखते हैं तो हम कुछ ही चीजों का सेवन कर पाते हैं। ऐसे में सेहत पर इसका असर पड़ता है। सेंधा नमक खाने से शरीर को फायदा पहुंचता है क्योंकि इसमें कैल्शियम और पोटेशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है। उपवास के समय लोग जल्दी थक जाते हैं और जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की परेशानी रहते हैं उनके लिए ये नमक फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसे खाने से शरीर से थकान दूर होती है और बॉडी रिलैक्स करती है। इसके साथ ही सेंधा नमक शरीर को डिटॉक्सीफाई भी करता है।
मां शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र आज से शुरू उपवास में करें इन चीजों का सेवन...
मां शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र आज से शुरू हो चुका है। इन नौ दिनों में मां के नौ अलग -अलग रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों मेेंं कुछ लोग उपवास रखते हैं तो कुछ लोग प्रथम, पंचम और अष्ठम तिथि का व्रत रखते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आप व्रत के दौरान भी भरपूर मात्रा में प्रोटीन और न्यूट्रिशन कैसे ले सकते हैं।
कुंदरू के सेवन से बढ़ती है इम्युनिटी...
कुंदरू एक ऐेसी सब्जी है जो बड़े ही चाव से खाई जाती है। कुंदरू कई औषधीय गुणों से भरपूर है। इस सब्जी के सेवन से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है। इसमें कफ और पित्त को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। त्वचा रोगों और डायबिटीज जैसी बीमारियों में इसके सेवन को फायदेमंद बताया गया है।
सर्दियों में खासतौर से सरसों तेल से शरीर की मालिश फायदेमंद होती है।
अंग्रेजी में शरीफा या सीताफल को कस्टर्ड एप्पल कहते हैं।
बाजार में अब शरीफा यानी सीताफल आने लगे हैं। इसे खाने से शरीर को बहुत फायदे मिलते हैं। अंग्रेजी में शरीफा या सीताफल को कस्टर्ड एप्पल कहते हैं। शरीफा का सेवन सामान्य लोगों के लिए तो फायदेमंद है ही, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए ये विशेष फायदेमंद है। इसका कारण है शरीफा में मौजूद पोषक तत्व और फाइबर। इसके अलावा शरीफा मीठा और क्रीमी गूदे से भरा फल है। इस फल में कई महत्वपूर्ण विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर होते हैं, जिसके कारण ये गर्भावस्था में खाया जाने वाला परफेक्ट फल है। आइये जाने इसे खाने से शरीर को क्या- क्या फायदे मिलते हैं-
बेहद फायदेमंद है सफेद अपराजिता
अपराजिता एक ऐसा पौधा है, जो कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है, इसका इस्तेमाल कई रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। अपराजिता का वानस्पतिक नाम है जिसे बहुत सी शारीरिक दुर्बलताओं को खत्म करने के लिए जाना जाता है। यह सफेद और नीले रंगों का होता है। नीली अपराजिता लोगों को आसानी से मिल जाती है लेकिन सफेद रंग की अपराजिता का मिलना दुर्लभ माना जाता है। श्वेत और नीले अपराजिता दोनों के गुण समान होते हैं। आयुर्वेद में अपराजिता को बहुत ही उपयोगी जड़ी बूटी के रूप में माना गया है। ये एक ऐसा पौधा है, जिसके कई औषधीय उपयोग है और साथ ही ये एक बहुत ही सुंदर घास से बनी होती है। आयुर्वेद के मुताबिक, अपराजिता का पौधा शरीर की संचार तंत्रिका और मनोवैज्ञानिक सिस्टम पर एक ही बहुत सुखदायक प्रभाव पड़ता है।
घंटों कंप्यूटर पर काम करना हो सकता है आंखों के लिए नुकसानदायक
ड्राई आई (Dry Eye) की वजह से आंखों की रोशनी तो कमजोर होती ही हैआधुनिक दौर में ज्यादातर नौकरियां सर्विस सेक्टर में ही आ रही हैं. इस जीवनशैली (Lifestyle) के साथ ही कामकाज का दबाव भी बढ़ा है. इस बीच लोग स्मार्टफोन (Smartphone) पर भी आजकल घंटों वक्त बिताते हैं.
कोरोना के हल्के और बिना लक्षण वाले मरीजों के उपचार के लिए गाइडलाइन्स
नई दिल्ली। ये बात सच है कि भारत में कोरोना वायरस का फैलना अभी रुका नहीं है, लेकिन इसकी गति में थोड़ी कमी जरूर आई है। इसके अलावा अब कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद गंभीर मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई है। ज्यादातर मरीज या तो हल्के-फुल्के लक्षणों वाले होते हैं या फिर बिना लक्षणों वाले। आयुष मंत्रालय ने ऐसे हल्के और बिना लक्षणों वाले मरीजों को ठीक करने के लिए आयुर्वेद और योग पर आधारित एक नैशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जारी किया है।